Thursday, 3 March 2011

ना जी पा रहा हूँ ना मर पा रहा हूँ ,

ना जी पा रहा हूँ ना मर पा रहा हूँ ,
राह जहाँ जा रही है चला जा रहा हूँ
यह कैसी है दूरी जो पास ला रही है,
दूर जितना जा रहा हूँ और पास आ रहा हूँ
बीती रात गुजरी बहुत तंग हम पर,
जिंदा अपनी मोहब्बत मैं चिनवा रहा हूँ
मेहनत है मेरी वो बन जाये मुकम्मल,
उसे लगता है कमियां गिनवा रहा हूँ

(सर्वाधिकार सुरक्षित @ दीपक शर्मा )

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Friday, 31 December 2010

नया साल मुबारक



आसमान ने सितारों भरी ओढ़ के चादर
ज़मीं का हाथ पकड़ के कहा ! चलो मेरी जान
अपनी औलाद जिसे दुनिया कहती है इंसान
उसकी खुशियों के वास्ते आओ दुआ मांगे

सारे संसार की खुशियाँ उन्हें देना मेरे मौला
उनके सपनो को ताबीर हो हासिल किसी भी हाल
हो उनकी दौलत,शौहरत और इज्ज़त में खूब इजाफा
उनकी हर ख्वाहिश को साकार बनाये नया साल

"दीपक" तेरी देहरी पे जलाते हैं ऐ ! जगतारक
औलांदे सब कुदरत की सबको नया साल मुबारक

दीपक शर्मा
सर्वाधिकार सुरक्षित @ दीपक शर्मा